Sunday, November 25, 2012

आजादी के इतने सालों बाद भी हमारे देश से छुआछूत जैसी सामाजिक समस्याँएन नहीं गयी हैं

अंगरेज तो भारत देश छोड़ कर चले गए लेकिन हमारे देश मैं अब भी छुआछूत के जैसी समस्याओं से घिरा हुआ है गाँधीजी जिस चीज़ को सालों पहले हटाना चाहते थे वो चीज़ आज भी हमारे देश मैं पूरे जूरों पर फल-फूल रही है आज भी हम लोग एक हरिजन अथवा को समाज से अलग मानते हैं हम लोग उन्हें एक पिछड़ा वर्ग मानते हैं इससे ये साभी होता है कि पिछड़े हुए वो लोग नहीं है पिछड़ी हुई हमारी सोच है 
छुआछूत
छुआछूत

हमसे अगर कोई सफाई करने वाला पानी मांग लेता है तो हम उसे वो बोतल/गिलास इस्तमाल करने नहीं देते हैं जिससे हम पानी पीते हैं हमें अपने आप को उन लोगों कि जगहा पर रख कर देखना चाहिए कि कैसा लगता है जब किसि इंसान को समाज से अलग कर दिया जाता है
मेरा आप लोगों से एक सवाल है- कि क्या आप एक ऐसे शहर मैं रह सकते हैं जहाँ पर सफाई के नाम पे कुछ भी नहीं होता है? अगर आप सोच पाएंगे तो आप को सवाल का मतलब और जवाब दोनों मिल जायंगे

मैं आप से अंत मैं ये ही कहना चाहता हूँ कि हर इंसान एक सामान है हम किसि भी इंसान को ऊँचा या नीचा तय नहीं कर सकते है हर इंसान कि समाज मैं एक बिलकुल अलग भूमिका होती है

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