Wednesday, April 4, 2012

हमारे सरकारी अस्पताल- अस्पताल के नाम पे कलंक हैं. और उनमें काम करने वाले डॉक्टर इंसान के रूप मैं हैवान

हमारे सरकारी अस्पताल क्या सच मैं अस्पताल हैं?
मेरा तो मानना हैं कि वे अस्पताल के नाम पे कलंक हैं!
क्यों कि जहां तक मैं जानता हूँ सरकारी अस्पताल मैं सेवाएँ रिश्वतखोरि के और कुछ नहीं होता है!

मैं यह बात आपको विस्तार मैं बताता हूँ -
मैं कई बार सरकारी  अस्पताल  मैं  मोईन  करने  जाता  रहता  हूँ  की  आजकल  क्या  चल  रहा  हैं  और  मैं  हर  बार  एक  ही  किस्म  की  चीज़ें  देखता  हूँ  जो  की  आपके  आगे  मैं  प्रस्तुत  करने  जा  रहा  हूँ .



  • डॉक्टर हमेशा महेंगी दवाई लिखता हैं.सरकारी अस्पताल के पास एक दवायिओं की दूकान होती हैं! और सोचने की बात ये हैं की जो दवाई डॉक्टर लिखता हैं वह सिर्फ उस ही दवाई वाले के मिलती हैं.
  • डॉक्टर मरीज से बार-बार पर्ची कटवाता हैं जिससे डॉक्टर को सरकार से और मुन्फ्फा मिल सके
  • अगर कोई मरीज डॉक्टर से ये कहा देता हैं की "डॉक्टर साहब क्रेपिया कर के मुझे सस्ती और असरदार दवाई ही लिखना"तो डॉक्टर भर्दक ने लगता हैं .
  • एक बार तो हद ही हो गयी थी जब मैंने देखा की एक अम्माजी जो की एक सड़क हादसे का शिकार हुई थी उनके पैर मैं बहुत तेज़ चौंत आई हुई थी और उनका बहुत साड़ी खून बहेराहा था और उनके घर वाले बार-बार डॉक्टर या कोम्पौनडर को बार बार बोल रहे थे की एक बार आप इनका इल्लग कर दी जिए लेकिन सरकारी कर्मचारियों के कान पे जून तक नहीं रेंग  रही थी!
  • डॉक्टर दवाई लिखते वक्त पूंछता हैं की बहार की लेगा या अन्दर की और ये और बोलता हैं की  बहार की ज्यादा असर करेगी क्योंकी बहार की दवाई मैं कोमिशन जो ज्यादा असर  करेगी!
  • डॉक्टर लेट आते हैं और जल्दी चले जाते हैं क्योंकी घर पे भी तो लोगों को लूटना होता हैं!

3 comments:

  1. sarkaari aspattal=fargi aspattal

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  2. Saale farji doctors hain.

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  3. I really don't like sarkaari doctors. patients are crying and they are drinking tea with biscits.

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Thanks.

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