Sunday, January 8, 2012

गरीबों का साल भर पेट भर सकता था

आज कोई भी राजनैतिक दल अपनी प्रतिबध्दता राष्ट्र और समाज के प्रति कम और अपने दल के प्रति अधिक प्रकट करता है |इसका सीधा-सीधा असर आम जनता की रोजमर्रा की आवश्यकतायों -रोटी,कपड़ा,मकान,स्वस्थ्य एवं शिक्षा पर पड़ रहा है|

"भारतीय स्वस्थ्य अनुसन्धान परिषद् " ने कुपोषण से बचने के लिए प्रति परिवार(दो व्यस्क और तीन बच्चों )के लिए कम से कम ५२ किलो ख...ाध्दान्न की आवश्यकता है |
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में केवल २५ किलो का वादा किया है,बाद में राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने ३५ किलो बी.पी.एल. परिवार के लिए और २० किलो सामान्य परिवार के लिए (इसमे दालों एवं तेल के लिए कोई प्रावधान नहीं है )|

दोस्तों,प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार,योजना आयोग के उपाध्यक्ष और कृषिमंत्री एक मत है की आर्थिक संकुचन के चलते सभी के लिए सस्ता अनाज मुहैया करा पाना संभव नहीं है |जबकि "हसन अली " पर प्रवर्तन निदेशालय ने ५० हजार करोड़ की कर चोरी का खुलासा किया है जिससे अकेले इसकी वसूली से देश के अधिकाँश गरीबों का साल भर पेट भर सकता था |

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