Friday, January 13, 2012

“अन्ना जलादो भ्रष्टाचार का पन्ना”

आजारे, फिर आजरे, फिर से अपना वही बिगुल बजारे,
आज हज़ारों में भी नहीं, लाखों में एक तुझ सा है हज़ारे !
तू ही बदल सकता है आज जन सहयोग से भ्रष्ट नज़ारे,
सतत संघर्ष से और जन्म लेंगे हज़ार नहीं लाखों हज़ारे !
चरित्रवान संघर्षमय जीवन-भोगी ही पलट सकता तसवीर,
जहाँ दीनहीन लोग पा रहे कष्ट, सम्पन्न ही खा रहे खीर !
चपल धन-लोलुप साम्रज्यवान वर्ग से परे छेड़ अपना संघर्ष,
तभी मिलेगा सशक्त बहुमत जो ला पायेगा वांछित निष्कर्ष !
सरकारी हठधर्मी तभी टूट सकेगी अकाट्य विवशता के कारण,
जो होगी ऐतिहासिक सफलता और एक अनुकरणीय उदाहरण !
प्रधान मंत्री हो या न्यायाधीश, कोई भी नहीं है भगवान समान,
जिनके लिए लोकपाल बिल से हो छूट का अतिविशिष्ट प्रावधान !
हट मत, हट मत, फिर आकर डट जा सर्वप्रिय-सच्चरित्र अन्ना,
तेरे तपोबल से ईश्वर अवश्य सहायक होगा जलाने को भ्रष्ट पन्ना !

Poet- ashwini kumar goswami

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